सुंदर भजन
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अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे
अगर नाथ देखोगे …
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पतितों को पावन हो करते कृपानिधि -2
किये पाप है इस सुयश के सहारे
अगर नाथ देखोगे …
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हमारे लिए क्यूँ देरी किये हो
गणिका अजामिल को पल भर में तारे
अगर नाथ देखोगे …
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माना अधम है अपावन कुटिल है
सब कुछ है लेकिन है भगवन तुम्हारे
अगर नाथ देखोगे …
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मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से
इसे शुद्ध करने में 'राजेश' हारे
अगर नाथ देखोगे …
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