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best hindi stories with moral

हिंदी कहानी - काफुर  | hindi stories   


क्या हुआ रेखा को आज,  इतनी आवाज़ क्यों कर रही है। कहीं कुछ गिर रहा, तो कहीं कुछ जल रहा। और बर्तन तो ऐसे टकरा रहे जैसे आपस में लड़ रहे हो।

रमेश ने करवट बदलते हुए सोचा, पर दिन पर दिन और आवाजें बढ़ने लगी, मतलब आलमारी से कपड़े निकाल कर बेड पर और तो और कामवाली पर आते ही बरसना वगैरा वगैरा…।

उसे अच्छे से याद है जब वो शादी करके आई थी तो गुस्सा बहुत करती थी, और तो और कई-2 दिनों तक खाना नहीं खाती थी, तब उसे पता नहीं था तो वो परवाह नहीं करता था और खा पीकर सो जाता, पर धीरे-धीरे जब उसको जानने और समझने लगा तो पहले तो रूठने का मौका ही नहीं देता था।

भाई सही बात है किसी को समझने के लिए थोड़ा वक्त तो चाहिए ही होता है। अब समझ गया तो गृहस्थी की गाड़ी दोनों की समझ-बूझ से पटरी पर दौड़ने लगी। फिर कुछ भी हो जाए सब एक तरह और ये पति पत्नी एक तरह सुनते सबकी करते अपने मन की अब ऐसा भी नहीं कि किसी को दुखी करते, तारीफी ये कि सबको खुश भी रखते।

धीरे धीरे परिवार तो कम होने लगा पर जिम्मेदारियां बढ़ने लगी। बच्चों की पढ़ाई, सभी का स्वास्थ्य, गृहस्थी सब उसके सिर आ गया। अब जब जिम्मेदारियां बढ़ती है तो कभी-2 झुंझलाहट हो जाती है। और आज तो कई वर्षों बाद झुंझलाई। कहते हैं ना उम्र और परिस्थितियां स्त्री को बहुत मजबूत, समझदार और सहनशील बना देती है।
ये भी वैसे ही हो गई है पर आज ….।

जब नहीं रहा गया तो उठा और उसका हाथ पकड़ कर हमेशा की तरह अपने पास बिठा लिया, और गले में बाहें डालकर माथे को चूमते हुए पूछा, क्या हुआ क्यों गुस्सा हो। मुझे पता है कि जब तुम झुंझलाती हो तो बोलती कुछ नहीं बस काम की जगह शोर ज्यादा करती हो। और फिर मुझे घंटों मनाना पड़ता है तब जाकर मानती हो। इतना सुनकर वो मुस्कुरा दी। जैसे सारी झुंझलाहट काफुर हो गई हो। सच मूड़ कितना भी खराब हो पर पति का प्यार और साथ मिल जाए तो कितनी भी गुस्सा हो पर पत्नी साझा करके हल्की हो ही जाती है।

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