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हिन्दी कहानी | पहल - जरुरी बातें


हिंदी कहानी - ' पहल '  -

नीमा बाहर से आयी, रास्ते में उसकी सहेली मिली थी, उसने अपनी समस्याएँ बतायी जिन पर विचार करते-2 नीमा कहीं खो सी गयी। पाँच घंटे हो गये, ना उसने अपने बेटे जुगल से बात की और न उसके कुछ पूछने पर ढंग से जवाब दिया। 
जुगल बेचैन हो गया, उसने नीमा से पूछा - क्या हुआ मम्मी, आप चुप क्यो है, क्या आप मुझसे नाराज हैं? मुझसे कुछ गलती हो गयी तो माफ कर दीजिये पर यूँ चुप मत रहिये, अच्छा नहीं लग रहा। मेरी चुप्पी जुगल को इतना विचलित कर देगी नीमा को अंदाजा नहीं था। अपनी बेचैनी भूल नीमा ने बेटे की बेचैनी को दूर करने के लिये अपनी खामोशी की वजह बतायी तब जाकर जुगल की ग्लानि शांत हुई। 

टूर से लौटने पर नीमा ने अपने पति सुशील को सब बताया, सुशील ने बेटे की भावनाओं को सराहा। नीमा ने कहा - मेरे पाँच घंटे बात न करने से जुगल इस कदर तड़प उठा तो कमल ( जुगल का चचेरा भाई) से तो हमने पाँच साल से बात नहीं की, उसकी क्या हालत होगी?
जुगल की बातों के बीच कमल के जिक्र पर सुशील ने पत्नी को डांटा - गलती कमल की थी, उसे बात करनी चाहिये थी, क्या कभी उसने की? नीमा ने कहा - कभी-2 परिस्थिति से निर्मित मनोस्थिति भी गलती का कारण हो सकती है, कमल के साथ भी शायद यही हुआ हो। हमने कभी उस वजह को जानने की कोशिश ही नहीं की, बड़े होने के नाते हम भी तो बात कर सकते थे परंतु हम पहल करने की बजाय उसकी पहल का इंतजार करते रहे।

अनजाने में ही जुगल, सुशील और कमल के टूटे रिश्ते को जोड़ने का माध्यम बन गया। सुशील ने कमल को फोन किया, कहा कि बेटा, मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ। शायद कमल इन शब्दों की ही राह ताक रहा था, वह बोला - मिलना तो मुझे भी है आपसे काका, कब आ रहे हैं, जल्दी आइये ना, कमल की आँखे बात करते ही भर आयीं। सुशील व नीमा पहुँचे, कमल पलकें बिछाये खड़ा था। उसने काका काकी के पैर छुए, फिर हाथ जोड़कर बोला," काका, गलती मेरी थी। वो मैंने कुछ शेयर लिये थे जिनके भाव अचानक गिरने से मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, टेंशन में होने से उस वक्त मैं आपको भला बुरा बोल बैठा। बाद में अफसोस भी हुआ, कई बार फोन लगाने का सोचा भी पर संकोच वश नहीं कर पाया, माफ कर दीजिये काका।" काका-काकी की आँखें और मन दोनो भीग रहे थे, उन्होंने कमल को गले लगा लिया। 

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