एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बनाकर रहता था। एक दिन "चूहे" ने देखा कि कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे है। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक 'चूहेदानी' थी।
खतरा भांपने पर उसने पिछवाड़े में जाकर। 'कबूतर' को यह बात बताई कि घर में चूहादानी आ गई है। 'कबूतर' ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौन सा उसमें फंसना है? निराश चूहा यह बात 'मुर्गे' को बताने गया। 'मुर्गे' ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा - जा भाई …यह मेरी समस्या नहीं है।
हताश 'चूहे' ने बाड़े में जाकर 'बकरे' को यह बात बताई - और बकरा हंसते-हंसते लोटपोट होने लगा।
उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज हुई, जिसमें एक जहरीला 'सांप' फंस गया था। अंधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और सांप ने उसे डस लिया।तबीयत बिगड़ने पर उस कसाई ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे 'कबूतर' का सूप पिलाने की सलाह दी। कबूतर अब पतीले में उबल रहा था। खबर सुनकर कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुंचे ! जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उस 'मुर्गे 'को काटा गया।
कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी ठीक हो गई, तो खुशी में उस कसाई ने अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी तो 'बकरे' को काटा गया ! तब तक 'चूहा' बहुत दूर जा चुका था।
👌🏻 कहानी की सीख-
🙏🏻अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बताएं और आपको लगे कि यह मेरी समस्या नहीं है, तो रुकिए और दुबारा सोचिए।
🙏🏻 समाज का एक अंग, एक तबका, एक नागरिक खतरे में है। तो समझ लो कही न कही पूरा समाज, वह पूरा देश खतरे में है।
🙏🏻अपने-अपने दायरे से बाहर निकलिए। स्वयं तक सीमित मत रहिए सामाजिक बनिए।

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