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बच्चों की हिन्दी कविता । घी की मटकी👷🧑‍🚀

ghee ki matki hindi kavita

😸 घी की मटकी 😸


बिल्ली आई एक कलूटी
छींकें ऊपर देखी मटकी।

कूदी, लपकी, उछली, लपकी
   यहां चढ़ी, वहां से टपकी

ऊपर ‌नीचे ऊलझी-अटकी
मगर मिली ना घी की मटकी

अम्मा की फिर टूटी झपकी
गई बेचारी मारी -डपटी
पछताती फिर भागी सटकी

भाग्य कहां जो छींका टूटे
या फिर फूटे घी‌ की मटकी

अम्मा की फिर टूटी झपकी
गई बेचारी मारी -डपटी ।।

पछताती फिर भागी सटकी।
भाग्य कहां जो छींका टूटे।
या फिर फूटे घी‌ की मटकी।।

👉रचयिता- पद्मा चौगांवकर👈

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