हवा और सूरज🥳 नन्हे बच्चों के लिए कहानी
👉 बहुत पहले की बात है। तब हवा और सूरज में खूब अच्छी दोस्ती थी ।
एक दिन हवा और सूरज में झगड़ा हो गया । हवा कह रही थी "मैं बड़ी हूं !" सूरज कह रहा था- मैं बड़ा हूं ! अब कौन निर्णय करें कि दोनों में से कौन बड़ा है?"
इतने में दोनों को दूर सड़क पर जाता एक राहगीर दिखाई दिया।
अचानक सूरज के मन में एक बात आई। वह बोला, सुनो हवा ! जो इस राहगीर का कुर्ता उतरवा देगा, समझो कि वह बड़ा है। क्या तुम तैयार हो?
हवा बोली- हां ज़रूर !
पहले हवा अपनी ताकत आजमाई। अभी थोड़ी देर पहले तो धीरे -धीरे सुहावनी हवा चल रही थी।
पर देखते ही देखते खूब जोर की आंधी चलने लगी। सड़क पर चलते राहगीर ने अपना कुरता कसकर पकड़ लिया ताकि वह आंधी में उड़ न जाए।
अब हवा को क्रोध आ गया। वह और तेजी से बहने लगी। पर राहगीर ने अब कुर्ता और भी कसकर पकड़ लिया था। फिर भला वह कैसे उड़ पाता?
हवा पस्त हो गयी। बोली- सूरज दादा, मैं तो सफल नहीं हो सकी। अब आप अपना ताकत आजमाईए।अब सूरज ने भी अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू किया। देखते ही देखते खूब गर्मी पड़ने लगी, राहगीर पसीने-पसीने हो गया। उसने झट अपना कुरता उतारा और कंधे पर रख लिया। फिर उसी तरह आगे चल पड़ा।
यह देखकर हवा बोली- "आज मैं समझ गई। सूरज दादा, आप ही बड़े हैं"।
फिर हवा और सूरज दोनों हंस दिए। एक साथ उनके मन का मैल साफ हो गया था।
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