एक दिन एक बहुत बड़े कजूंस व्यापारी के घर में कोई मेहमान आया ।
कजूंस व्यापारी ने अपने बेटे से कहा, आधा किलो बेहतरीन मिठाई ले आओ मेहमान के लिए ।
व्यापारी का बेटा बाहर गया और कई घंटों बाद वापस आया।
कंजूस बाप ने बेटे से पूछा, मिठाई कहाँ है?
बेटे ने बताना शुरू किया- अरे पिताजी, मैं मिठाई की दुकान पर गया और हलवाई से बोला कि सबसे अच्छी मिठाई दे दो। तो हलवाई ने कहा कि ऐसी मिठाई दूंगा जो बिल्कुल मक्खन जैसी होगी ।
फिर मैंने सोचा कि क्यों न मक्खन ही ले लूं। मैं मक्खन लेने दुकान गया और बोला कि सबसे बढ़िया मक्खन दो। तो दुकान वाला बोला कि ऐसा मक्खन दूंगा जो बिल्कुल शहद जैसी होगी ।
तब मैने बहुत गंभीरता सोचा कि क्यों न शहद ही ले लूं। मै फिर गया शहद वाले के पास और उससे कहा कि सबसे मस्त वाला शहद चाहिए। तो वह भी बोला ऐसा शहद दूंगा जो बिल्कुल पानी जैसा साफ होगा ।
तो पिताजी फिर मैंने सोचा कि पानी तो अपने घर पर ही है और पानी खरीद के पैसे क्यों बर्बाद करना ।
तो पिताजी, क्यों न हम मेहमान को बिलकुल स्वच्छ पानी ही पिला दें
कंजूस बहुत खुश हुआ और उसने अपने बेटे को शाबाशी दी। लेकिन तभी उसके मन में कुछ गंभीर शंका उत्पन्न हुई और उसने बहुत व्याकुलता से अपने पुत्र से पूछा?
"लेकिन बेटे तू इतनी देर तक घूम कर आया , तेरी चप्पल तो जरुर घिस गयी होंगी।"
तो बेटे ने कहा, "पिताजी ये तो उस मेहमान की चप्पल हैं जो घर पर आया है मैं इतना भी नादान नहीं हूँ ।"
बाप की आंखों मे खुशी के आंसू आ गए और उसने अपने बेटे को गले से लगा लिया

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