अम्बे तू है जगदम्बे काली
अंबे तू है जगदंबे काली जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गाए भारती हो मैया उतारे तेरी आरती !!
तेरे ही गुण गाए भारती हो मैया उतारे तेरी आरती !!
माता तेरे भक्त जनों पर भीड़ पड़ी है भारी
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी
सौ सौ सिंहो से तू बलशाली अष्टभुजाओं वाली
दुष्टों को पल में संहारती हो मैया उतारे तेरी आरती !!
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी
सौ सौ सिंहो से तू बलशाली अष्टभुजाओं वाली
दुष्टों को पल में संहारती हो मैया उतारे तेरी आरती !!
मां बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता
पूत कपूत सुनी है पर न माता सुनी कुमाता
सबपे करुणा दर्शाने वाली अमृत बरसाने वाली
दुखियों के दुखड़े निवारती हो मैया उतारे तेरी आरती !!
नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना
हम तो मांगे मां तेरे मन में एक छोटा सा कोना
सबकी बिगड़ी बनाने वाली लाज बचाने वाली
सतियो के सत को संवारती हो मैया उतारे तेरी आरती !!
🙏🙏
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1 टिप्पणियाँ
जय माँ काली...
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