रवि पढ़ाई में तेज था हाईस्कूल से ग्रेजुएशन पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर रिसर्च में वह हमेशा अव्वल ही था सबको भरोसा था कि रवि का प्लेसमेंट बडे आराम से हो जाएगा उसने एक मल्टीनेशनल कंपनी के इंटरव्यू के पहले तीन राउंड भी कर लिए थे आखिरी राउंड में कंपनी के डायरेक्टर खुद इंटरव्यू ले रहे थे डायरेक्टर ने पूछा क्या आपको कभी कोई स्कॉलरशिप मिली है रवि ने कहा अब तक तो नहीं
डायरेक्टर फिर सवाल किया स्कूल की फीस कैसे जमा की आपने क्या आपके पिता घर के खर्च संभालते थे तो रवि ने कहा मैं 1 साल का था तभी मेरे पिता का देहांत हो गया था जिसके बाद घर का खर्च मेरी मां पर निर्भर था डायरेक्टर ने पूछा क्या करती हैं आपकी मां रवि ने बताया सर वह लोगों के घरों में कपड़े धोती हैं डायरेक्टर ने कहा क्या मैं आपके हाथ देख सकता हूं रवि ने हाथ दिखा दिए उसके हाथ एकदम साफ मुलायम और बेदाग थे डायरेक्टर ने पूछा क्या आपने कभी कपड़े धोने में मां की मदद की रवि ने कहा मैंने कोशिश की लेकिन मां चाहती थी कि मैं सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दूं
डायरेक्टर ने कहा आज मेरा एक काम करोगे घर जाकर अपनी मां के हाथ अच्छे से साफ करना फिर कल आकर सुबह मुझसे मिलना रवि खुश था उसे चैन की पूरी उम्मीद थी घर लौटकर उसने मां से कहा आज मैं आपके हाथ धोना चाहता हूं यह सुनकर माँ को अच्छा लगा लेकिन थोड़ा अटपटा भी रवि ने देखा कि उसकी मां के हाथों में झुर्रियां पड़ गई थी कहीं जगह से कटे हुए कई जगह गड्ढे भी पड़े थे
रवि की आंखों से आंसू बहने लगे पहली बार अपने हाथों में मां के हाथों को पकड़े वह उनका दर्द महसूस कर पा रहा था उसको समझ आ गया था उसकी फीस मां कैसे चुका रही थी उस दिन बाकी के बचे हुए सारे कपड़े खुद रवि ने धोये
रात में काफी देर तक रवि और उसी मां बातें करते रहे अगले दिन जब रवि डायरेक्टर के पास पहुंचा तो डायरेक्टर उसकी सूजी हुई आंखों को देखकर पूरी कहानी समझ गया और उसने रवि से पूछा कि कल के अनुभव से आपने क्या सीखा रवि ने कहा मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं आज जो भी हूं अपनी मां की वजह से हूं और मुझे पहली बार परिवार की अहमियत समझ में आयी
डायरेक्टर बोले मुझे ऐसा ही व्यक्ति चाहिए था जो रिश्ते और मूल्यों को पैसे से बढ़कर माने हमारी कंपनी में तुम्हारा स्वागत है

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