उस दिन मैं दफ्तर से जल्दी निकल गया था। कुछ देर पहले ही बारिश हुई थी। ठंडी हवा मन को बहुत सुबह रही थी। काफी दिनों बाद देर तक चलने रहने का मन हो रहा था। पास में ही एक नया पार्क ' गुलाब वाटिका ' बना था। जाने कब से इस पार्क में जाने का मन था। लेकिन कमबख्त वक्त ही नहीं मिलता था। उस दिन कदम खुद-ब-खुद पार्क की तरफ बढ़ने लगे चले। पार्क में पैदल चलने वालों के लिए बढ़िया मार्ग बना था। बीच-बीच में आराम करने के लिए कुर्सियां, बच्चों के खेलने के लिए झूले, और तरह-तरह के सुंदर फूल और वृक्ष लगाए गए थे।
यह पार्क देखकर बचपन की बहुत याद आ रही थी। तभी चलते चलते देखा, सामने मिट्टी का एक ढेर पड़ा था, जो बारिश की वजह से कीचड़ में तब्दील हो गया था। यह मिट्टी शायद माली ने नए पेड़ों में भरने के लिए मंगवाई होगी। लेकिन बारिश के कारण कीचड़ के रूप में वह पैदल मार्ग पर चला आया था मैं बाई तरफ से कीचड़ से बचते बचाते निकल ही रहा था, कि तभी अचानक मुझ पर हमला हो गया। पहला हमला, दूसरा हमला, फिर तीसरा, ऐसा लगातार कई बार होता रहा। इस हमले में मुझे कोई चोट नहीं लग रही थी, न ही कपड़े गंदे हो रहे थे, केवल हंसी आ रही थी।
एक छोटी सी तितली मेरे ऊपर बार-बार अपनी पूरी ताकत से आकर टकरा रही थी। ऐसा लग रहा था कि वह जान-बूझकर अपने पूरे शरीर की ताकत से मेरे सीने पर, मेरे गले पर निशाना लगा रही थी और मुझे आगे जाने से रोक रही थी।
मैं तीन चार कदम पीछे हट गया। तितली शांत हो गई। लेकिन जैसे ही मैंने आगे बढ़ने का प्रयास किया वह अपने छोटे-छोटे पंखों को फड़फड़ाते हुए फिर हमला करने लगी। जैसे ही मैंने सोचा चलो दूसरी ओर से चलते हैं तो वह तितली पीछे हट गई और कीचड़ के पीछे की तरफ जाकर बैठ गई। वही, एक और तितली पड़ी थी, जो घायल थी। शायद कोई उसके पंख तोड़ कर चला गया था और वह अंतिम सांसे गिन रही थी। शायद इसीलिए दूसरी तितली मुझ पर बार-बार हमला कर रही थी कि मैं आगे ना जाऊं और मेरे पैर गलती से भी उस जख्मी तितली पर ना पड़ जाए। इतनी नन्ही सी तितली अपने से हजार गुना बड़े शरीर वाले इंसान से भी सिर्फ इसलिए टकरा गई कि शायद उसे उस जख्मी तितली के साथ कुछ पल और बिताने के लिए मिल जाए। वह दिन सचमुच मुझे हमेशा याद रहेगा। उस नन्हीं सी तितली ने मुझे सिखा दिया कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी हो, डगर चाहे कितना भी कठिन हो, उससे घबराना नहीं चाहिए, डटकर लड़ना चाहिए।
कहानी से सीख :-
घुटनों के बल चलने वालों को कभी भी सफलता नहीं मिलती है

1 टिप्पणियाँ
Nice story
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