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Hindi Moral Stories : अपनी काबलियत खुद तय करे


अंश रोज सुबह तैयार होकर स्कूल जाता था स्कूल से छुट्टी के बाद पैसे कमाने के लिए एक अस्तबल में घोड़ों की सफाई करता था और रात में एक ढाबे पर वेटर की तरह काम करता था एक बार उसके स्कूल में उसकी क्लास टीचर ने सभी बच्चों को मेरा सपना विषय पर निबंध लिखने को कहा 

उस रात अंश एक पल भी नहीं सोया उसने 12 पन्नों का निबंध लिखा जिसमें उसने बताया कि वह कैसे 200 एकड़ में घोड़ों का एक फार्म बनाना चाहता है जिसमें 400 वर्ग फुट का उसका अपना एक घर होगा और 50 घोड़े होंगे यह निबंध लिखने के लिए उसने बहुत मेहनत की थी फार्म की एक-एक बारीकी को उसने गंभीरता से सोचकर अपनी निबंध में प्रस्तुत किया था 

यहां तक कि फार्म की डिजाइन और घोड़ों के नाम भी अंश ने निबंध में सम्मिलित किए थे अगले दिन स्कूल में उसने अपना निबंध क्लास टीचर को जमा कर दिया अंश को उम्मीद थी कि उसका निबंध क्लास में सबसे अलग होगापर 2 दिन बाद जब पेपर वापस मिले तो अंश ने देखा टीचर ने उसे फेल कर दिया था अंश की आंखों में आंसू बहने लगे वह टीचर के पास फेल होने की वजह पूछने गया तो टीचर ने उससे कहा तुम एक गरीब परिवार से आए हो रात की रोटी का ठिकाना नहीं होता दो-दो नौकरी करने के बाद भी अगले महीने की स्कूल की फीस जमा कर पाओगे या नहीं यह तो तुम्हें पता नहीं तुम कैसे घोड़ों के इतने बड़े फार्म के बारे में सोच सकते हो क्या तुम्हारे पास इतने पैसे हैं कि तुम एक घोड़ा भी खरीद पाओ मैं तुम्हें एक और मौका देती हूं कल फिर से अपना निबंध लिखकर लाना पर इस बार कुछ ऐसा लिखना जो तुम सच में हासिल कर पाओ ऐसे सपने नहीं देखनी चाहिए जिन्हें हासिल ना कर सके अंश पूरी तरह से टूट गया था 

उस दिन वह किसी काम पर ना जा सका घर पहुंचा तो उसके पिता ने उसे समझाया बेटा तुम्हारे सपने सिर्फ तुम्हारे अपने हैं किसी को तुम्हारे सपनों को तय करने का कोई हक नहीं लेकिन अपने अंदर माद्दा होना चाहिए की अपने सपनों को साकार कर सकें यह निर्णय तुम्हारा है अगले दिन फिर वही निबंध लेकर अपनी टीचर के पास गया और बोला आपने मुझे जो अंक दिए वह मुझे मंजूर है लेकिन अपने सपने से समझौता करना मुझे मंजूर नहीं सपने उम्र, जाति, धर्म या गरीबी, अमीरी के आधार पर नहीं देखे जाते वह केवल अपनी काबिलियत पर निर्भर करते हैं जो अपनी काबिलियत से समझौता कर लेगा वह कभी अपने सपनों को साकार नहीं कर सकेगा 

कहानी से सीख 

क्यों कोई और यह तय करें कि हमारी काबिलियत क्या है

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