Hindi Poem for Kids - माँ, कह एक कहानी
प्रस्तुत कविता का प्रसंग सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध ) के जीवन से लिया गया है इस कविता में भगवान गौतम बुद्ध के पुत्र राहुल और पत्नी यशोधरा दो पात्र है ! बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने की बालहठ करता है और माँ बालक को उसी के पिता की कहानी सुनाती हैं
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माँ, कह एक कहानी
बेटा, समझ लिया क्या तूने
मुझकों अपनी नानी ?
कहती है मुझसे यह चेटी,
तू मेरी नानी की बेटी !
कह माँ, कह लेटी ही लेटी,
राजा था या रानी ?
माँ, कह एक कहानी !
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सुन उपवन में बड़े सवेरे,
तात भ्रमण करते थे तेरे !
जहाँ सुरभि मनमानी
जहाँ सुरभि मनमानी ,
हाँ, माँ यही कहानी !
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वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे,
झलमल कर हिमबिंदु झिले थे
हलके झोंके हिले-मिले थे
लहराता था पानी
लहराता था पानी,
हाँ हाँ यही कहानी !
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गाते थे खग कल-कल स्वर से
सहसा एक हंस ऊपर से
गिरा बिद्ध होकर खग शर से,
हुई पक्ष की हानी !
हुई पक्ष की हानी ?
करुणा भरी कहानी !
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चौंक उन्होंने उसे उठाया
नया जन्म-सा उसने पाया
इतने में आखेटक आया
लक्ष्य सिद्धि का मानी,
लक्ष्य सिद्धि का मानी !
कोमल कठिन कहानी !
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माँगा उसने आहत पक्षी
तेरे तात किन्तु थे रक्षी !
तब उसने, जो था खगभक्षी
हठ करने की ठानी,
हठ करने की ठानी !
अब बढ़ चली कहानी !
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हुआ विवाद सदय-निर्दय में
उभय आग्रही थे स्व-विषय में,
गई बात तब न्यायालय में
सुनी सभी ने जानी,
सुनी सभी ने जानी !
व्यापक हुई कहानी !
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राहुल तू निर्णय कर इसका
न्याय पक्ष लेता है किसका ?
माँ, मेरी क्या बानी ?
मैं सुन रहा कहानी !
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य न उसे उबारे ?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी !
न्याय दया का दानी !
तूने सुनी कहानी !!
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~~ रचयिता ~~
- मैथलीशरण गुप्त -

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