Dheshbhakti Geet - वीर तुम बढ़े चलों
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वीर, तुम बढ़े चलों
धीर, तुम बढ़े चलों
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साथ में ध्वजा रहे
बाल-दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नही
दल कभी रुके नही
वीर तुम बढ़े चलों
धीर तुम बढ़े चलों
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सामने पहाड़ हो
सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर, हटो नही
तुम निडर, डटो वही
वीर तुम बढ़े चलों
धीर तुम बढ़े चलों
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प्रातः हो कि रात हो
संग हो न साथ हो
सूर्य सा बढ़े चलों
चन्द्र सा बढ़े चलों
वीर तुम बढ़े चलों
धीर तुम बढ़े चलों
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~~ रचयिता ~~
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
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