Hindi Poem for Kids - बहुत बड़ा है यह संसार
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सबसे पहले मेरे घर का,
अंडे जैसा था आकार !
तब मैं यही समझती थी बस,
इतना-सा ही है संसार !!
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फिर मेरा घर बना घोंसला,
सूखे तिनके से तैयार !
तब मैं यही समझती थी बस,
इतना-सा ही है संसार !!
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फिर मैं निकल गई शाखाओं पर,
हरी-भारी थी जो सुकुमार !
तब मैं यही समझती थी बस,
इतना-सा ही है संसार !!
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आखिर जब मैं आसमान में,
उड़ी दूर तक पंख पसार !
तभी समझ में मेरे आया !
बहुत बड़ा है संसार !!
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शिक्षा- हमे अपनी सोच का दायरा बढ़ाते रहना चाहिए !

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