Hindi Poem for Kids - चाँद का कुर्ता
हठ कर बैठा चाँद एक दिन
माता से यह बोला,
सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का
मोटा एक झिंगोला !!
☺☺☺
सन-सन चलती हवा रात भर
जाड़े से मरता हूँ
ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह
यात्रा पूरी करता हूँ !!
☺☺☺
आसमान का सफर और यह
मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुर्ता
ही कोई भाड़े का !!
☺☺☺
बच्चें की सुन बात
कहा माता ने ' अरे सलोने '
कुशल करे भगवान
लगे न तुझकों जादू टोने !!
☺☺☺
जाड़े की तो बात ठीक है
पर मैं तो डरती हूँ
एक नाप में कभी नही
तुझकों देखा करती हूँ !!
☺☺☺
कभी एक अंगुल भर चौड़ा
कभी एक फुट मोटा
बड़ा किसी दिन हो जाता है
और किसी दिन छोटा !!
☺☺☺
घटता-बढ़ता रोज किसी दिन
ऐसा भी करता है
नही किसी की आँखों को
तू दिखलाई पड़ता है !!
☺☺☺
अब तू ही बता नाप तेरी
किस रोज लिवाये
सी दें एक झिंगोला जो,
हर रोज बदन में आये !!
~~ रचयिता ~~
रामधारी सिंह 'दिनकर'

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