Recent Post

6/recent/ticker-posts

Hindi Kavita : चाँद का कुर्ता


Hindi Poem for Kids - चाँद का कुर्ता 


हठ कर बैठा चाँद एक दिन 
माता से यह बोला,
सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का 
मोटा एक झिंगोला !!
☺☺☺
सन-सन चलती हवा रात भर 
जाड़े से मरता हूँ 
ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह 
यात्रा पूरी करता हूँ !!
☺☺☺
आसमान का सफर और यह 
मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुर्ता 
ही कोई भाड़े का !!  
☺☺☺
बच्चें की सुन बात 
कहा माता ने ' अरे सलोने '
कुशल करे भगवान 
लगे न तुझकों जादू टोने !!
☺☺☺
जाड़े की तो बात ठीक है
पर मैं तो डरती हूँ 
एक नाप में कभी नही 
तुझकों देखा करती हूँ !!
☺☺☺
कभी एक अंगुल भर चौड़ा 
कभी एक फुट मोटा 
बड़ा किसी दिन हो जाता है 
और किसी दिन छोटा !!
☺☺☺
घटता-बढ़ता रोज किसी दिन 
ऐसा भी करता है 
नही किसी की आँखों को 
तू दिखलाई पड़ता है !!
☺☺☺
अब तू ही बता नाप तेरी 
किस रोज लिवाये 
सी दें एक झिंगोला जो,
हर रोज बदन में आये !!

~~ रचयिता ~~

रामधारी सिंह 'दिनकर'

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ