👉ईमानदारी की सीख👈
एक गांव में एक व्यापारी रहता था। वह अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए रोज दूध बेचता था। एक दिन वह जब शाम को दूध बेचकर घर लौटा तो अपने सारे पैसे इकट्ठा करके सोचने लगा कि काश मेरे पास और ज्यादा दूध होता तो मैं और पैसा कमा लेता। काफी देर रात तक वह इस बारे में सोचता रहा और धीरे धीरे उसकी यह सोच लालच में बदल गई।
दूसरे दिन जब वह दूध लेकर बाजार जा रहा था तो उसे रास्ते में एक नदी मिली उसने नदी से थोड़ा जल अपने दूध के डिब्बे में मिला दिया जिससे उसका दूध रोज से ज्यादा हो गया। घर आकर देखा तो पहले दिन से उसका पैसा ज्यादा था अब उसके मन में और ज्यादा लालच बढ़ गई।
नदी के समीप एक पेड़ पर बंदर रहता था वह व्यापारी को दूध में पानी मिलाते रोज देख रहा था।एक रोज व्यापारी दूध बेचकर आ रहा था तो नदी के किनारे पेड़ के नीचे उसकी आराम करने की इच्छा हुई तो वह पेड़ के नीचे अपने सर पास पैसों का गट्ठर रखकर लेट गया। ठंडी ठंडी हवा चलने की वजह से व्यापारी नींद में सो गया।
पेड़ पर बैठा बंदर धीरे से आकर उसके पैसों का गट्ठर लेकर पेड़ पर चढ़ गया और उसमें से कुछ पैसे नदी में फेंका तो व्यापारी जाग गया और बहुत कोशिश की अपनी पैसों का गट्ठर वापिस लेने के लिए। लेकिन 🐒 बंदर एक मुट्ठी पैसे नदी में फेंकता और एक मुठ्ठी पैसा जमीन पर फेंकता।
ऐसा वह तब तक करता रहा जब तक गट्ठर से पैसा खत्म नहीं हो गया। यह सब देखकर व्यापारी जमीन पर बैठ कर अपना सर पकड़ लिया और पूरे मन से पश्चाताप करने लगा। उसे अपनी गलती का अहसास हो चुका था और आगे से उसने दूध में पानी न मिलाने का संकल्प लिया और जमीन पर पड़े पैसे उठाकर अपने घर चल दिया।
तो बच्चों, हमें इस कहानी से यह सीख लेनी चाहिए कि हमें मेहनत और ईमानदारी से ही जीना चाहिए।।🤔🤔

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