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Shakuntala Devi (शकुंतला देवी को मानव कंप्यूटर क्यों कहा जाता है?)


कौन थी शकुंतला देवी और उन्हें मानव कंप्यूटर का खिताब क्यों दिया गया था आइये उनके बारे में जानते है

शकुंतला देवी एक भारतीय लेखिका और मानसिक गणिका थीं, जिन्हें "ह्यूमन कंप्यूटर" के नाम से जाना जाता था। उन्होंने छात्रों के लिए संख्यात्मक गणना को सरल बनाने का प्रयास किया।

इनका जन्म 4 नवंबर 1929, बेंगलुरु में हुआ था इनके पिता का नाम बिश्व मित्र मणि था अद्भुत प्रतिभा की धनी शकुंतला देवी का मस्तिष्क किसी कैलकुलेटर से कम नहीं था वो चुटकियों में बड़ी बड़ी गणनाएं कर दिया करती थीं दिलचस्प बात यह है कि बचपन में बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ही उनमें चीज़ों को याद करने और संख्याओं की गणना करने की अद्भुत प्रतिभा थी उनके पिता एक सर्कस में काम करते थे और जब वो सिर्फ तीन साल की थीं तभी उन्होंने अपनी बेटी की इस प्रतिभा को पहचान लिया था

अमरीका में 1977 में शकुंतला ने कंप्यूटर से मुक़ाबला किया इस में 188132517 का घनमूल बता कर शकुंतला देवी ने जीत हासिल की 1980 में उन्होंने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में
स्वछंद तरीके से चुनी गईं 13 अंकों वाली दो संख्याओं 7,686,369,774,870 और 2,465,099,745,779 का गुणनफल तुरत-फुुु बता दिया

उनकी इसी प्रतिभा के कारण उनका नाम 1982 में ‘गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी शामिल किया गया

इसी तरह लंबी लंबी गणनाओं से सबको हैरान कर देने वाली शकुंलता पर 1988 में कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर आर्थर जेंसन ने अध्ययन किया जेंसन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि उनके नोटबुक पर उत्तर लिखने से पहले ही शकुंतला जबाव दे देती थीं

इनके पति का नाम परितोष बनर्जी था और इनकी एक बेटी है जिनका नाम अनुपमा बनर्जी है इनका निधन 21 अप्रैल 2013, बैंगलोर अस्पताल, बेंगलुरु में हुआ था

दिलचस्प बात ये है की इन पर एक मूवी भी आयी थी 2020 में Shakuntala Devi जिसे OTT प्लेटफोर्म पर रिलीज़ किया गया था इसमें प्रमुख किरदार शकुंतला देवी का विद्या बालन ने निभाया है जिस्शु सेनगुप्ता, सान्या मल्होत्रा ​​और अमित साध आदि अन्य कलाकारों ने भी फिल्म में काम किया है

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