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Karwa Chauth 2022 | करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, करवा चौथ में सरगी क्या होती है

करवा चौथ कैसे करे  (Karwa Chauth 2022 Kaise Kare)-

करवा चौथ व्रत को भारत में सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जल रखती हैं। अपने पति की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए सुहागिन महिलाएं चंद्र देव की पूजा करती हैं। और शाम को चन्द्रमा के उदय होने के बाद व्रत खोलती हैं। इस व्रत में भगवान शिव परिवार सहित चंद्र देवता की भी पूजा की जाती है


करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस बार यह व्रत 24 अक्टूबर 2021, रविवार के दिन किया जाएगा। करवा चौथ में कुछ परंपराएं जरूरी होती हैं। इस व्रत में सरगी का रिवाज है

क्या होता है 'सरगी'-

सरगी एक भोजन की थाली है जिसमें खाने की कुछ चीजें होती हैं। जिसको खाने के बाद दिन भर निर्जला उपवास रहा जाता है और फिर रात में चन्द्रमा की पूजा करने के बाद ही खाया जाता है। 

किसके हाथों लेनी चाहिए 'सरगी'-

वैसे तो सरगी लेने का रिवाज सास के हाथों है लेकिन अगर घर में सास नहीं हैं तो फिर बड़ी ननद या जेठानी के हाथों इसे लेना चाहिए। सरगी लेने का सही समय भोर में तीन से चार बजे के बीच होता है।

ये चीजें करें शामिल 'सरगी' में:-

  • खीर को सरगी जरूर शामिल करें। खीर शुभ होता है और पोषण के लिए भी अच्छा है।
  • ड्राय फ्रूट्स को सरगी में शामिल करें ताकि दिन भर के लिए पर्याप्त ऊर्जा आपको मिल सके।
  • रोटी के साथ हरी सब्जी और सलाद जरूर लें, यह भी दिन भर ऊर्जा देने के साथ ही पोषण की आपूर्ति करेगा।
  • फल बहुत जल्दी पच जाते हैं लेकिन कम समय में जरूरी पोषण और ऊर्जा के लिए ये जरूरी हैं। 

शुभ मुहूर्त:-

24 अक्टूबर 2021, दिन रविवार को सुबह 05 बजकर 43 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक करवा चौथ की संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त है, इस दिन चंद्रोदय शाम 8 बजकर 7 मिनट तक होगा।



करवा चौथ व्रत की पूजा विधि:- (Karwa Chauth 2021 Puja Vidhi)

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। स्नान आदि के बाद सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  • करवा चौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करतीं फिर शाम के समय चांद का दर्शन कर व्रत खोलती हैं।
  • पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे को रखें।
  • एक थाली में धूप, दीप, चंदन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं।
  • पूजा चांद निकलने के एक घंटे पहले शुरू कर देनी चाहिए। इस दिन महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं।
  • पूजन के समय करवा चौथ कथा जरूर पढ़े या सुनाएं।
  • चांद को छननी से देखने के बाद अर्घ्य देकर चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए।
  • चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए

चंद्र को अर्घ्य दें तो यह करवा चौथ पे मंत्र अवश्य बोलें….

करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।

इस दिन बहुएं अपनी सास को थाली में मिठाई, फल, मेवे, रुपए आदि देकर उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लेती हैं।

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