दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा या अन्नकूट पूजा की जाती है यह प्रकृति की पूजा है जिसका आरम्भ श्रीकृष्ण ने किया था इस दिन प्रकृति के आधार, पर्वत के रूप में गोवर्धन की पूजा की जाती है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा की जाती है यह पूजा ब्रज से आरम्भ हुई थी और धीरे धीरे पूरे भारत वर्ष में गोवर्धन पूजा मनाई जाने लगी
जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर इन्द्र का मान-मर्दन किया तथा उनके सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी, सभी गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे, तब ब्रह्मा जी ने इन्द्र को बताया कि पृथ्वी पर श्रीकृष्ण ने जन्म ले लिया है, उनसे बैर लेना उचित नहीं है। तब श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्रदेव अपने इस कार्य पर बहुत लज्जित हुए और भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा-याचना की।
भगवान श्रीकृष्ण ने 7वें दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव 'अन्नकूट' के नाम से मनाया जाने लगा।
गोवर्धन पूजा कैसे करे:
- प्रातः काल स्नान ध्यान करें
- घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाएं
- गोबर का गोवर्धन पर्वत बनाएं, पास में ग्वाल बाल, पेड़ पौधों की आकृति बनाएं
- मध्य में भगवान कृष्ण की मूर्ति रख दें इसके बाद भगवान कृष्ण, ग्वाल-बाल और गोवर्धन पर्वत का षोडशोपचार पूजन करें
- पकवान और पंचामृत का भोग लगाएं
- गोवर्धन पूजा की कथा सुनें, प्रसाद वितरण करें और सबके साथ भोजन करें
गोवर्धन पूजा पर्व तिथि व मुहूर्त:
गोवर्धन पूजा पर्व तिथि - शुक्रवार, 5 नवंबर 2021
सुबह 5 बज कर 28 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक पूजन का शुभ मुहूर्त है
दूसरा मुहूर्त शाम को 5 बजकर 16 मिनट से 5 बजकर 43 मिनट तक है

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