हमारा भारत देश पूरे विश्व में अपनी संस्कृति, सभ्यता और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है यहाँ पर जनमानस अपनी छोटी -2 खुशियों को उत्सव की तरह सेलिब्रेट करते है, हमारे देश में विभिन्न रंग- रूप, पहनावा, धर्म-परंपराओं, रीति-रिवाजों को मान्यता दी गई है और यहाँ का हर त्यौहार हमारी संस्कृति से बंधा हुआ है। वैसे तो हमारे यहाँ पूरे वर्ष कोई न कोई त्यौहार हर माह रहता है लेकिन कार्तिक माह में त्योहारों की लिस्ट थोड़ी लंबी होती है इस माह में आये प्रमुख त्यौहार धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन-पूजा, और भाई-दूज के बाद एक और प्रमुख त्यौहार आता है छठ पूजा, जिसे लोग विधि-विधान व नियम के साथ मनाते हैं। छठ पूजा जन कल्याण के लिए एक प्राकृतिक पूजा है जिसमें लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हैं और उपवास रखते हैं। वास्तव में छठ पूजा क्या है? इसे कैसे मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है? इस लेख में देखते है
कब होती है छठ पूजा ( Chhathh Puja Date)
छठ पूजा (Chhathh Puja) हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है दिवाली के बाद हिंदू जनमानस में छठ सबसे बड़े त्योहारों में से एक माना जाता है इस बार छठ पूजा 28 अक्टूबर 2022, से शुरू है और 31 अक्टूबर तक चलेगा, इस त्यौहार को उत्तर भारत, खासतौर से बिहार, यूपी, झारखंड में बेहद प्यार और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है तिथि के अनुसार, छठ पूजा 4 दिनों की होती है इस दिन लोग सूर्य देव की स्तुति करते हैं और साथ ही मीठे व सात्विक पकवान भी पकाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा एक ऐसा त्यौहार है जिसका वर्णन वेदों में भी किया गया है और यह एक पुरानी प्रथा है। यह पूजा कार्तिक महीने की षष्ठी के दिन होती है जिसे षष्ठी पूजा या सूर्य पूजा भी कहा जाता है। यह त्योहार कार्तिक महीने की चतुर्थी से शुरू होता है और सप्तमी तिथि में इसका समापन किया जाता है परंतु इस त्यौहार में लोग षष्ठी के दिन छठी मैया की पूजा करते हैं।
कैसे की जाती है छठ पूजा
ऐसी मान्यता है कि छठी मैया भगवान सूर्य की बहन हैं और उनकी पूजा करने के लिए ही छठ का त्यौहार मनाया जाता है। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए ही लोग कार्तिक महीने की षष्ठी के दिन सूर्य देवता की स्तुति करते हैं। इस दिन लोग भोर के समय गंगा या यमुना नदी के किनारे या अपने आसपास के नदी में सूर्य देवता व छठी मैया का स्मरण करते हैं व उनसे प्रार्थना करते हैं। इस त्यौहार के चारों दिन शुद्ध शाकाहारी सात्विक भोजन बिना लहसुन-प्याज के ही पकाया जाता है। इस वर्ष छठ पूजा की तिथियां है
पहला दिन- नहाय-खाय
छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है इस वर्ष नहाय-खाय 28 अक्टूबर (शुक्रवार) को है और सूर्योदय सुबह 06:31 बजे और सूर्यास्त शाम को 05:37 बजे पर होगादूसरा दिन- लोहंडा या खरना
(छठ पूजा का व्रत रखने वाला व्यक्ति खरना के पूरे दिन व्रत रखता है। उसके बाद रात को खीर खाता है और फिर सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर पारण करने तक निर्जल उपवास रखता है। खरना एक प्रकार से शारीरिक और मानसिक शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें रात में भोजन के बाद अगले 36 घंटे का कठिन व्रत रखा जाता है। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है। इसमें गुड़ और चावल का खीर बनाया जाता है, साथ ही पूड़ियां, खजूर, ठेकुआ आदि बनाया जाता है। पूजा के लिए मौसमी फल और कुछ सब्जियों का भी प्रयोग होता है। व्रत रखने वाला व्यक्ति इस प्रसाद को छठी मैया को अर्पित करता है। खरना के दिन प्रसाद ग्रहण कर वह व्रत प्रारंभ करता है। छठ पूजा का प्रसाद बनाते समय गाँव में आम की लकड़ियों का ही प्रयोग होता है।)
तीसरा दिन- छठ पूजा (सन्ध्या अर्घ्य)
चौथा दिन- सूर्योदय अर्घ्य (पारण का दिन)
सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय आपको नदी में पानी के भीतर जाना होता है इसलिए बच्चों को इससे दूर रखें ताकि उन्हें कोई भी हानि न हो।
यह व्रत 36 घंटों तक निर्जला रखा जाता है इसलिए यदि आप गर्भवती हैं या आपको कोई भी शारीरिक समस्या है तो आप सिर्फ पूजा करके ईश्वर से प्रार्थना करें और व्रत न रखें।
छठ पूजा के दिन नदी के तटों में काफी भीड़ रहती हैं इसलिए विशेषकर गर्भवती महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतना जरूरी है।


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