आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे एक ऐसी शख्सियत के बारे जिनका बचपन बहुत बुरा बीता और उन्हें छोटी उम्र में बहुत परेशानियों से होकर गुरजना पड़ा लेकिन उन्होंने उन सभी परेशानियों से अपने आपको निकाला और अब वो एक अच्छा जीवन जी रही है और एक प्रोफेशनल योगा ट्रेनर का काम कर रही है
हम बात कर रहे है नताशा नोएल की जिनकी कहानी हिंसा और दर्द से भरी हुई है और जिन्होंने आगे चल कर लोगों को माफ़ कर दिया और 21 साल की उम्र तक आते -2 नताशा असल मायनों में सकारात्मक जीवन जीना सीख पाईं.
जब नताशा करीब साढ़े तीन साल की थीं उन्होंने देखा कि उनकी मां ने एक दिन अचानक खुद को आग लगा ली और मानसिक रोग (स्कित्ज़ोफ्रेनिया) से पीड़ित उनके पिता को रिमांड होम भेज दिया गया तब नताशा अपने गॉड पेरेन्ट्स के साथ रहने लगीं
सात साल की उम्र में उनके साथ बलात्कार किया गया और आगे कुछ सालों तक उन्हें कई बार यौन हिंसा का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने किसी को इसके बारे में कुछ नहीं बताया. नताशा का पूरा बचपन खुद को दोषी ठहराने के दर्द में बीता उन्हें लगने लगा की "दर्द शायद मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया था और मुझे खुद को पीड़ित समझना अच्छा लगने लगा था मुझे लगता था कि मेरे साथ बुरा ही होना चाहिए."
इसी उम्र में डिस्लेक्सिया (पढ़ने में आने वाली एक मानसिक समस्या) और बुलिंग (स्कूल में परेशान किए जाने) के कारण उन्होंने पढ़ाई में भी काफी महत्वपूर्ण समय गँवा दिया किसी तरह उन्होंने स्नातक की डिग्री ली और फिर उनकी मां (जिन्होंने उनको पाला था) ने उन्हें टीचर बनने की राय दी उनकी मां का मानना था कि ये नताशा के लिए सुरक्षित नौकरी होगी लेकिन नताशा टीचर नहीं बनना चहती थी क्योकि वह मानसिक रूप से इसके लिए तैयार नही थी .
इसके बाद नताशा के जीवन में एक और अहम मोड़ आया, जब उनका ब्रेक-अप हुआ तब वो और टूट गई लेकिन इसके बाद उनमें बदलाव की एक चाहत भी जागी
ये वो वक्त था जब नताशा ने एक बड़ी बात सीखी, "आपको खुद अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा क्योंकि आपके लिए कोई और ये काम नहीं करेगा " नताशा ने पाया कि वो खुद को दोष देने से उबर रही हैं और अपने शरीर के साथ सहज भी हो रही हैं
कम उम्र में ही नताशा ने अपने मानसिक स्वास्थ्य का इलाज कराना शुरु कर दिया था लेकिन इस बार उन्होंने अपने स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए कुछ और रास्ते अपनाने का फ़ैसला किया इस पर आगे बढ़ते रहने के लिए उन्होंने एक डायरी बनाई जिसमें वो रोज़ाना अपने घटने वाली उन बातों का लिखा करती थीं और साथ ही उन्होंने अपने लिए कुछ उद्देश्य भी तय किए "नताशा ने अपने डिप्रेशन और फिर उसके कारण रहने वाले तनाव को ही एक प्रेरणा के रूप में लिया कि मैं इससे बाहर निकलूं." नताशा अब अपने शरीर और जिंदगी से प्यार करना सीख गई थी
डिप्रेशन और तनाव से उबरने के लिए नताशा ने मेडिटेशन (ध्यान लगाना) शुरू कर दिया और अपने शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए उन्होंने योग करना शुरू कर दिया . जिससे उन्हें काफी आराम मिलने लगा तो नताशा ने इसके लिए प्रोफेशनल तरीके से योग-आसन-प्राणायाम सीखना शुरू कर दिया
नताशा कहती हैं, "योग से मुझे अपने मन को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिलती है ये प्रक्रिया धीमी ज़रूर है लेकिन इससे मुझे जो कुछ हासिल हुआ है वो उत्साह बढ़ाने वाला है." समय बीतने के साथ ही वो खुद को बेहतर स्थिति में मानती हैं.
नताशा कहती हैं, "आज की तारीख में, चाहे कुछ हो जाए मैं रोज़ सवेरे कुछ देर के लिए योगभ्यास करती हूं और फिर कुछ देर के लिए ध्यान लगाती हूं"
नताशा कहती हैं कि इससे अधिक तनाव वाले दिन भी कम तनाव वाले दिन बन जाते हैं और उन्हें खुद को प्यार करने के अपने नियम का पालन करने में मदद मिलती है
नताशा ने तय किया है कि वो अपनी जीवन शैली बदल देंगी और फिर उन्होंने योग शिक्षिका के रूप में काम करना शुरू कर दिया आज नताशा एक पोपुलर योग शिक्षिका हैं, मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाती हैं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं वो मानती हैं उनका सफर खुद को अपनाने की शुरुआत से हुआ सोशल मीडिया पर उनके काफी फोलोवेर्स है
अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में उन्होंने लिखा है, "मेरे बारे में आप जो कहेंगे मैं वो और उससे भी बहुत बुरा अपने बारे में पहले ही सोच चुकी हूं."
वह लोगों को अपने शरीर से प्यार करना सिखाती हैं और उन्हें योग अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं उनका Natasha Noel के नाम से YouTube चैनल भी है जिसपर लगभग 6 लाख सब्सक्राइबर है .
लेकिन अब ये शब्द नताशा को परेशान नहीं करते. नताशा कहती हैं, "मैंने ज़िंदगी को देखने का नज़रिया ही बदल दिया है और अब मैं बेहतर तरीके से काम करने की कोशिश करती हूं."


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