मां शैलपुत्री :-
शारदीय नवरात्रि पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होता है और नवमी तिथि तक चलता है। इस बार यह त्योहार 7 अक्तूबर से शुरू हो रहा है शारदीय नवरात्रि का पर्व 15 अक्टूबर को समाप्त होगा। हिन्दू धर्म के इस पावन पर्व पर माँ दुर्गा के नौ अलग-२ स्वरूपों की पूजा होती है। नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना का विधान होता है। इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
माँ ब्रह्मचारिणी :-
शारदीय नवरात्रि के आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर देवी दुर्गा माँ के दूसरे स्वरूप की पूजा आराधना की जाती है इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है अपने पूर्व जन्म में जब ये हिमालय के घर में पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं तब नारद के उपदेश से इन्होने भगवान शंकर जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी। इस घनघोर तपस्या के कारण इन्हें तपस्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है।
माँ चंद्रघंटा :-
दुनिया में इससे बड़ा कोई कर्म नहीं है
जिसमे माता की पूजा का जिक्र न हो
दुनिया में तो कोई ऐसा धर्म नहीं है
नवरात्रि में दुर्गा-उपासना के तीसरे दिन की पूजा का विशेष महत्व होता है। मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-अर्चन किया जाता है। इनका यह स्वरुप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। दस भुजाओं वाली देवी के हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र विभूषित है
माँ कूष्मांडा :-
कोई पागल है धन दौलत का, तो कोई पागल है नारी का
लेकिन सच्चा पागल वो पागल है
जो पागल है माँ शेरोंवाली का
नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की साधना की जाती है। कहते हैं कि जब सृष्टि नहीं थी और चारों तरफ सिर्फ अन्धकार ही अन्धकार था, तब मां दुर्गा के इसी स्वरुप ने हल्की सी मुस्कान बिखेर कर चारों तरफ प्रकाश ही प्रकाश उत्पन्न कर ब्रह्माण्ड की रचना की।
माँ स्कंदमाता :-
मईया जी की जय जयकार
नवरात्रि के पाचवे दिन देवी दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना की जाती है देवी स्कंद मातृस्वरूपिणी की चार भुजाएं हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है।
माँ कात्यायनी :-
बिगड़ी बनाती है माँ शेरोंवाली
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कात्यायन ऋषि की तपस्या से खुश होकर मां ने पुत्री के रूप में उनके घर जन्म लिया था। इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा मां की आराधना करने से विवाह संबंधी किसी भी प्रकार के दोष हो, वे खत्म हो जाते हैं। मां कात्यायनी का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है मां कात्यायनी ने महिषाषुर का वध कर तीनों लोकों को इसके आतंक से मुक्त कराया मां कात्यायनी को लाल रंग बेहद पसंद है। उन्हें शहद का भोग लगाया जाता है मां कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं
माँ कालरात्रि :-
हल्का -२ सुरूर मिलता है
जो भी आता है मेरी माँ के दर पे
उसे कुछ न कुछ जरुर मिलता है
चैत्र नवरात्रि का सातवा दिन मां कालरात्रि का होता है आज के दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से सभी पाप कर्मों का क्षय होता है और ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का नाश होता है ऐसा कहा जाता है कि इनका स्मरण मात्र से ही बुरी शक्तियां दूर चली जाती हैं। साथ ही कुंडली की ग्रह बाधाएं भी दूर होती है।
माँ महागौरी :-
आयी शेरोंवाली माँ बिगड़ी बना ले
माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है दुर्गापूजा नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सदा फलदायिनी है इनकी उपासना से भक्तों के सभी दुःख दूर हो जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं और भविष्य में पाप-संताप, दुःख उसके पास कभी नहीं जाते वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है महागौरी की चार भुजाएँ हैं इनका वाहन वृषभ है इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।
सिद्धिदात्री माँ :-
अरे पीना है तो माँ के नाम का जाम पी
माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है।



2 टिप्पणियाँ
Jai Mata Di
जवाब देंहटाएंJai ambe maa
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