MSME की OLD परिभाषा
भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 को अधिनियमित किया है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा निम्नानुसार है:
माल के निर्माण (manufacture) या उत्पादन (production), प्रसंस्करण (processing) या संरक्षण (preservation) में लगे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा:
# एक माइक्रो (सूक्ष्म) एंटरप्राइज एक ऐसा उद्यम है जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश रुपये से 25 लाख अधिक नहीं है।
# एक छोटा (लघु) उद्यम एक ऐसा उद्यम है जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश मिनिमम 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक होता है।
# एक मध्यम उद्यम एक उद्यम है जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश मिनिमम 5 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक होता है।
उपरोक्त सभी प्रकार के उद्यमों में ये जो निवेश लागत निर्धारित किया गया है लघु उद्योग मंत्रालय द्वारा यह भूमि और भवन को छोड़कर मूल लागत है
लघु उद्योग वर्गीकरण (classification)

एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. करीब 12 करोड़ लोगों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर करती है. ये उद्यम देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29 फीसदी का योगदान करते हैं.
एमएसएमई की नई परिभाषा
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को संक्षिप्त में MSME कहा जाता है. एमएसएमई दो प्रकार के होते हैं.
- मैनुफैक्चरिंग उद्यम यानी उत्पादन करने वाली इकाई.
- दूसरा है सर्विस एमएसएमई इकाई. यह मुख्य रुप से सेवा देने का काम करती हैं. हाल ही में सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा बदली है. नए बदलाव के निम्न श्रेणी के उद्यम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग में आएंगे.
सूक्ष्म उद्योग: सूक्ष्म उद्योग के अंतर्गत अब वह उद्यम आते हैं जिनमें एक करोड़ रुपये का निवेश (मशीनरी वगैरह में) और टर्नओवर 5 करोड़ तक हो. यहां निवेश से मतलब यह है कि कंपनी ने मशीनरी वगैरह में कितना निवेश किया है. यह मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों क्षेत्र के उद्यमों पर लागू होता है.
लघु उद्योग: उन उद्योगों को लघु उद्योग की श्रेणी में रखा गया है जिन उद्योगों में निवेश 10 करोड़ और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक है. यह निवेश और टर्नओवर की सीमा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर में लागू होती है
मध्यम उद्योग: मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योग जिनमें 50 करोड़ का निवेश और 250 करोड़ टर्नओवर है वह मध्मम उद्योग में आएंगे . इससे पहले वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर पैकेज का ऐलान करते हुए एमएसएमई की परिभाषा बदली थी. वित्त मंत्री ने 20 करोड़ रुपये का निवेश और 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर वाले उद्यमों को मध्यम उद्योग में रखा था.लेकिन उद्यमी सरकार के इस नए बदलाव से भी खुश नहीं था. इसके बाद 1 जून 2020 को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने उद्यमियों की मांग को पूरा करते हुए यह बदलाव किया है. अब मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योग जिनमें 50 करोड़ का निवेश (मशीन और यूनिट लगाने का खर्च आदि) और 250 करोड़ टर्नओवर है वह मध्मम उद्योग में आएंगे .
विभिन्न MSME उद्योग लिस्ट:-
- टोकरी बनाना
- चमड़े का बेल्ट जूता या चप्पल बनाना
- जूते साफ करने की पॉलिश बनाना
- कपड़े रखने का बक्सा या अटैची बनाना
- प्लेट व कटोरी बनाना
- झाड़ू बनाना
- पारम्परिक औषधियां बनाना
- पेपर बैग व लिफाफे बनाना
- बंधनेवाला ट्यूब,
- हर्बल सामान जैसे साबुन, तेल आदि बनाना
- हाथ से बने चॉकलेट बनाना
- कुकी व बिस्कुट बनाना (Parle G कंपनी की शुरुआत भी ऐसे ही हुई थी)
- देशी माखन, घी व पनीर बनाना और डिब्बा बंद कर बेचना
- मोमबत्ती व अगरबत्ती बनाना
- टॉफ़ी व चीनी की मिठाई बनाना
- सोडा व अलग फ्लेवर्ड ड्रिंक बनाना
- फलों का गूदा निकालना व बेचना
- क्लाउड किचन खोलना (Cloud kitchen – Swiggy/Zomato पर खाना बेचना)
- घर में इस्तेमाल किया जाने वाला कूलर बनाना
- फैंसी जेवेलरी बनाना
- डिस्पोजेबल कप-प्लेट बनाना
- एल्युमीनियम का सामान जैसे बर्तन बनाना
- हॉस्पिटल में उपयोग किए जाने वाला स्ट्रेचर बनाना
- करंट मापने वाला पर मीटर या वोल्ट मीटर बनाना
- गाड़ी में लगने वाली हेडलाइट बनाना
- कपड़े या चमडे का बैग बनाना
- बटुआ व हैंडबैग बनाना
- मसाले बनाने का काम
- कांटेदार तार बनाना (fence)
- टेलीविज़न सेट्स
- कैलकुलेटर
- माइक्रोवेव घटक
- प्लास्टिक फिल्म कैपेसिटर
- कार्बन फिल्म रजिस्टर
- इलेक्ट्रोमेडिकल उपकरण
- इलेक्ट्रॉनिक शिक्षण एड्स
- डिजिटल मापने के उपकरण
- एयर कंडीशनिंग उपकरण
- ऑप्टिकल लेंस
- दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स
- विद्युत मोटर्स
- कीटनाशक सूत्रधार
- फोटोग्राफिक सेंसिटिव पेपर
- रेज़र ब्लेड

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