नमस्कार दोस्तों,
आज के इस ब्लॉग में हम एक ऐसे जीनियस साइंटिस्ट की बात करने जा रहे है जिनको उनके देश की सरकार ने अपने अहम के कारण देश निकाला कर दिया था बहुत रोचक किस्से है उनकी जिंदगी के आईये जानते है आधुनिक कंप्यूटर के जनक एलन टूरिंग के बारे में…
एलन टूरिंग के पिता इंडियन सिविल सर्विस में अफसर थे. उस वक़्त बिहार और उड़ीसा प्रांत के छतरपुर में पोस्टिंग थी. इनके नाना मद्रास रेलवे में इंजिनियर थे. ये कंप्यूटर जीनियस भारत में पैदा हो सकता था लेकिन ऐलन के माता-पिता ने तय किया कि उनका बेबी लंदन में पैदा होगा. इसलिए उनके पिता ने इंडिया में अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली. और ऐलन के लिए दोनों ट्रेवल कर लंदन पहुंचे. जहां ऐलन पैदा हुए. ऐलन को गणित से प्यार था. लेकिन उस वक़्त स्कूलों में साइंस पढ़ना खराब माना जाता था. ऐलन का साइंस पढ़ना उनकी मां को शर्मिंदा करता था. एक अंग्रेज़ जेंटलमैन बनने के लिए भाषा और अंग्रेजी ग्रंथों की पढ़ाई को जरूरी माना जाता था. ऐलन की भाषा कमज़ोर थी. जिसके कारण अंग्रेजी टीचर उनसे परेशान रहते थे. ये मां के लिए हमेशा परेशानी और शर्मिंदगी का कारण था. लोग बताते हैं ऐलन थोड़ा हकलाते थे. कई बार बोलने में अटकते. और बोलते समय सही शब्द नहीं आते थे. इसी के चलते उनका इंटरव्यू करने वाले पत्रकार अक्सर अपना धीरज खो बैठते थे
ऐलन का पहनावा फॉर्मल नहीं था. जब हर लड़के से उम्मीद की जाती थी कि वो जेंटलमैन बने, ऐलन बिखरे बाल, बढ़े हुए नाखून और बिना टाई के रहते. उनका चहरा इतना जवान था कि 30 की उम्र में भी लोग उन्हें अंडरग्रेजुएट समझते थे
ऐलन को दौड़ने का खूब शौक था. जिन दो जगहों पर वो काम करते थे, उनके बीच 10 मील का फासला था. जिसे तय करने के लिए उनके साथी पब्लिक ट्रांसपोर्ट लिया करते. जबकि वो पूरा रास्ता दौड़कर ही तय कर लेते थे. उन्होंने एक मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया था, जिसमें इनका रनिंग टाइम 2 घंटे 46 मिनट 30 सेकंड था. ये ओलिंपिक के मैडल विजेता से बस 11 मिनट कम था. लोग पूछते कि इतना क्यों दौड़ते हो. तो कहते, मुझे नौकरी से इतना स्ट्रेस हो जाता है कि दौड़ने के अलावा उसे अपने दिमाग से निकालने का कोई चारा नहीं है
पहले विश्व युद्ध में ब्रिटेन और फ़्रांस ने मिलकर जर्मनी को हराया था. ये वो दौर था जब जर्मनी में हिटलर जवान हुआ था. और पूरे जर्मनी में उसका बोलबाला होने वाला था. दूसरे वर्ल्ड-वॉर की तैयारी चल रही थी. जर्मनी ने तय किया था, इस बार किसी भी कीमत पर नही हारेंगे. और नए-नए हथियारों के साथ उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जिसे एनिग्मा मशीन कहते थे. ये मशीन एक तगड़े कम्युनिकेशन के लिए बनाई गई थी. जिससे सेना और सरकार के बीच भेजे गए संदेश बिना इधर-उधर हुए जल्दी पहुंच जाएं. इस मशीन के दम पर जर्मनी दुनिया जीतने के ख्वाब देख रहा था.
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