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Alan Turing- Father of Modern Computer (जिसे नपुंसक बनाकर देश से निकाल दिया गया)

नमस्कार दोस्तों,

आज के इस ब्लॉग में हम एक ऐसे जीनियस साइंटिस्ट की बात करने जा रहे है जिनको उनके देश की सरकार ने अपने अहम के कारण देश निकाला कर दिया था बहुत रोचक किस्से है उनकी जिंदगी के आईये जानते है आधुनिक कंप्यूटर के जनक एलन टूरिंग के बारे में

https://www.jaruribaten.com/2020/09/blog-post.html

एलन टूरिंग के पिता इंडियन सिविल सर्विस में अफसर थे. उस वक़्त बिहार और उड़ीसा प्रांत के छतरपुर में पोस्टिंग थी. इनके नाना मद्रास रेलवे में इंजिनियर थे. ये कंप्यूटर जीनियस भारत में पैदा हो सकता था  लेकिन ऐलन के माता-पिता ने तय किया कि उनका बेबी लंदन में पैदा होगा. इसलिए उनके पिता ने इंडिया में अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली. और ऐलन के लिए दोनों ट्रेवल कर लंदन पहुंचे. जहां ऐलन पैदा हुए. ऐलन को गणित से प्यार था. लेकिन उस वक़्त स्कूलों में साइंस पढ़ना खराब माना जाता था. ऐलन का साइंस पढ़ना उनकी मां को शर्मिंदा करता था. एक अंग्रेज़ जेंटलमैन बनने के लिए भाषा और अंग्रेजी ग्रंथों की पढ़ाई को जरूरी माना जाता था. ऐलन की भाषा कमज़ोर थी. जिसके कारण अंग्रेजी टीचर उनसे परेशान रहते थे. ये मां के लिए हमेशा परेशानी और शर्मिंदगी का कारण था. लोग बताते हैं ऐलन थोड़ा हकलाते थे. कई बार बोलने में अटकते. और बोलते समय सही शब्द नहीं आते थे. इसी के चलते उनका इंटरव्यू करने वाले पत्रकार अक्सर अपना धीरज खो बैठते थे

ऐलन का पहनावा फॉर्मल नहीं था. जब हर लड़के से उम्मीद की जाती थी कि वो जेंटलमैन बने, ऐलन बिखरे बाल, बढ़े हुए नाखून और बिना टाई के रहते. उनका चहरा इतना जवान था कि 30 की उम्र में भी लोग उन्हें अंडरग्रेजुएट समझते थे

ऐलन को दौड़ने का खूब शौक था. जिन दो जगहों पर वो काम करते थे, उनके बीच 10 मील का फासला था. जिसे तय करने के लिए उनके साथी पब्लिक ट्रांसपोर्ट लिया करते. जबकि वो पूरा रास्ता दौड़कर ही तय कर लेते थे. उन्होंने एक मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया था, जिसमें इनका रनिंग टाइम 2 घंटे 46 मिनट 30 सेकंड था. ये ओलिंपिक के मैडल विजेता से बस 11 मिनट कम था. लोग पूछते कि इतना क्यों दौड़ते हो. तो कहते, मुझे नौकरी से इतना स्ट्रेस हो जाता है कि दौड़ने के अलावा उसे अपने दिमाग से निकालने का कोई चारा नहीं है

पहले विश्व युद्ध में ब्रिटेन और फ़्रांस ने मिलकर जर्मनी को हराया था. ये वो दौर था जब जर्मनी में हिटलर जवान हुआ था. और पूरे जर्मनी में उसका बोलबाला होने वाला था. दूसरे वर्ल्ड-वॉर की तैयारी चल रही थी. जर्मनी ने तय किया था, इस बार किसी भी कीमत पर नही हारेंगे. और नए-नए हथियारों के साथ उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जिसे एनिग्मा मशीन कहते थे. ये मशीन एक तगड़े कम्युनिकेशन के लिए बनाई गई थी. जिससे सेना और सरकार के बीच भेजे गए संदेश बिना इधर-उधर हुए जल्दी पहुंच जाएं. इस मशीन के दम पर जर्मनी दुनिया जीतने के ख्वाब देख रहा था.


लेकिन ब्रिटेन में एक लड़का था. ब्रिटिश सरकार के लिए कोड ब्रेकिंग का काम करता था. उसने एनिग्मा मशीन का कोड तोड़ दिया, एक बॉम्ब नाम की मशीन बनाकर.  ऐलन का ये योगदान न सिर्फ ब्रिटेन को जीत के करीब ले गया, बल्कि दूसरे विश्व युद्ध को 4 साल छोटा कर दिया. न जाने कितने लोगों की जान जाने से बच गई .

देश और दुनिया के लिए 3 बड़ी चीजें करने के बाद भी ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ ने ऐलन को जेल भेजने के निर्देश दे दिए. क्योंकि ऐलन टूरिंग गे थे. ऐलन ने बोला मैं जेल नहीं जाना चाहता. तो उनका केमिकल कैस्ट्रैशन करके उनको देश-निकाला दे दिया गया. केमिकल कैस्ट्रैशन मतलब दवाइयों के सहारे सेक्स की क्षमता को ख़त्म कर देना होता है.  

इस ट्रीटमेंट ने ऐलन को वो बना दिया, जिसे आम भाषा में लोग ‘नपुंसक’ कहते हैं. इसके अलावा औरतों के हॉर्मोन बढ़ाने से ऐलन के स्तन बढ़ गए थे. ऐलन दुनिया से अलग होते गए. लेकिन काम करना नहीं छोड़ा. हर दिन पूरी ताकत से खुद को समझाते कि कुछ नहीं बदला है. लेकिन एक समय ऐसा भी आया कि ऐलन का धीरज जवाब देने लगा और उन्होंने 7 जून 1954 एक सेब में साइनाइड लगा कर खा लिया. और इस तरह अपनी जान ले ली. मौत के समय ऐलन की उम्र महज़ 41 साल थी.

साल 2009 में एक सिग्नेचर कैंपेन के बाद ब्रिटिश सरकार ने माना कि ऐलन को दी गई सजा गलत थी. प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने माफ़ी मांगी. लेकिन दुनिया का एक जीनियस तो खो चुका था. 

Alan Turing, Father of Modern Computer
Father of Modern Computer, Alan Turing

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